जबलपुर (मध्य प्रदेश) के पास कटंगी में हिरन नदी के बीचों-बीच स्थित नाहन देवी माता मंदिर लगभग 2000 साल पुरानी एक विशाल शिला (चट्टान) के रूप में पूजी जाती है। मान्यता है कि एक मछुआरे के नदी में मिले पवित्र कलश और माता के दर्शन के बाद इस स्थान पर पूजा शुरू हुई। मकर संक्रांति पर यहाँ विशाल मेला लगता है। नाहन देवी माता मंदिर की कहानी और मान्यताएँ: रहस्यमयी प्रकटीकरण: कहा जाता है कि कई साल पहले हिरन नदी में मछुआरों का जाल एक पुराने कलश में फंस गया था। तेज बहाव के बावजूद एक मछुआरे ने उसमें छलांग लगा दी। 12 दिन का रहस्य: वह मछुआरा 12 दिनों तक लापता रहा और फिर उसी जाल के पास जीवित मिला। उसने बताया कि उसने मां नाहन देवी के दर्शन किए हैं, जिसके बाद से यहाँ पूजा शुरू हुई। प्राचीन शिला: नदी के बीच स्थित यह विशाल चट्टान ही देवी मां का रूप मानी जाती है, जिसे लगभग 2000 साल से पूजा जा रहा है। मान्यता है कि चट्टान का एक बड़ा हिस्सा पानी के अंदर है। स्थान: यह मंदिर जबलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर, कटंगी के पास ककरहटा गांव में हिरन नदी के तट पर स्थित है। मुख्य पर्व: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है और भक्तों की मान्यताएं पूरी होती हैं। यह मंदिर अपने शांत वातावरण और नदी के बीचों-बीच अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। ए प्रसिद्ध है।
यहाँ लाल, गुलाबी और काली चट्टानें देखने को मिलती हैं जो इसे बेहद खास बनाती हैं।